हाथ काटू चैन सँ
बात काटू चैन सँ
पाँच बर्खक मत भेटल अछि
घेंट काटू चैन सँ
दिन भरिक डाका सँ थाकल
राति काटू चैन सँ
देस जरि सुड्डाह भ' जाय
फोंफ काटू चैन सँ
बुझि बपौती, मातृभूमिक
जड़ि काटू चैन सँ
मिट्ठ सोनित छै मनोजक
दाँत काटू चैन सँ
हैदराबाद
२६/०१/२०१५
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