अंदर
बंद दरवाज़े के पीछे
इत्मीनान से
चाय कॉफ़ी के माहौल में
हो रहा है कुछ
खुसुर-फुसुर..
बाहर
दिल थामे कुछ
सकपकाए लोग
देख रहे हैं
कांपते आँखों से
बंद दरवाज़े की ओर
टुकुर-टुकुर..
श्श!
आवाज़ न करें
शोर न मचाएं
ध्यान रहे
ये हाकिमो की मजलिस है
यहां बेतक़दीरों की
तक़दीरें
जा रही हैं लिखी..
यहाँ बंद दरवाजों के बाहर
इजाज़त है महज़
सहमे दिलों को धड़कने की
आहिस्ते-आहिस्ते
धुकुर-धुकुर...
हैदराबाद
२८/०१/२०१५
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