Wednesday, January 28, 2015

मजलिस


अंदर
बंद दरवाज़े के पीछे
इत्मीनान से
चाय कॉफ़ी के माहौल में
हो रहा है कुछ
खुसुर-फुसुर..

बाहर
दिल थामे कुछ
सकपकाए लोग
देख रहे हैं
कांपते आँखों से
बंद दरवाज़े की ओर
टुकुर-टुकुर..

श्श!
आवाज़ न करें
शोर न मचाएं
ध्यान रहे
ये हाकिमो की मजलिस है
यहां बेतक़दीरों की
तक़दीरें
जा रही हैं लिखी..

यहाँ बंद दरवाजों के बाहर
इजाज़त है महज़
सहमे दिलों को धड़कने की
आहिस्ते-आहिस्ते
धुकुर-धुकुर...

हैदराबाद
२८/०१/२०१५

Monday, January 26, 2015

चैन सँ

हाथ काटू चैन सँ
बात काटू चैन सँ

पाँच बर्खक मत भेटल अछि
घेंट काटू चैन सँ

दिन भरिक डाका सँ थाकल
राति काटू चैन सँ

देस जरि सुड्डाह भ' जाय
फोंफ काटू चैन सँ

बुझि बपौती, मातृभूमिक
जड़ि काटू चैन सँ

मिट्ठ सोनित छै मनोजक
दाँत काटू चैन सँ

हैदराबाद
२६/०१/२०१५