Sunday, July 25, 2010

एक और दुनिया

उठो मित्र
सर उठाओ
अपनी इधर की उदासी
पीछे छोडो
और
आगे देखो
उधर की ओर

देखो चमकता हुआ सूर्य
स्कूल बस में बैठे
चहकते हुए बच्चे
मुस्कराते हुए
रिकशे/टैक्सी/ठेले वाले
ठहाके लगाते
मुटिया मजदूर
गुनगुनाते हुए हल जोतते
खेतों में किसान
कोयल की कू कू
परिंदों के गुटर गू

तुम्हारी दुनिया से परे
एक और भी है दुनिया
तुम्हारे आस पास
बहुत नज़दीक
जहां -
हंसी/मुस्कराहट/ उल्लास
मुफ्त में मिलती है
दो वक्त की रोटी के साथ

उठो मित्र
सर उठाओ
हिम्मत करो
और रखो कदम
सीमा के पार ..

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