Saturday, July 24, 2010

परिवर्तन

घिरे हो क्यों अंधेरों से
सलाखें तोड़ कर निकलो !
उजालों की कमी क्या है
दिशा बदलो, दशा बदलो !!

अकेले तुम नहीं रण में
उठो, इतिहास रच डालो !
सही अब भी बहुत कुछ है
दिशा बदलो, दशा बदलो !!

1 comment:

  1. उजालों की कमी क्या है
    दिशा बदलो, दशा बदलो !!
    sundar atisundar badhai

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